Back to Top
FacebookLinkedInTwitterGooglePlus

कैद है तू मुझमें।।














लकीरों से भी ज्यादा ..
मेरे हाथों में ..
तुझ तक जो जाएँ ..
वो राहें ..
कैद हैं..
कैद हैं ..
बंद खिड़कियों में ..
धड़कन ...
बेचैनियों में ..
तड़पन..
जो अपना बनाएँ ..
वो हवाएं..
कैद हैं .
कैद हैं ...
नज़र ना लगे ..
इन लम्हों को ..
इनमे तू संग है..
तो रंग हैं ..
खाली थी जो मेरी सुबहा ..
अब मेरी शाम में भी
तू संग है..
प्यार की अदाएँ ..

खोल दे बाहें ..
जो कैद हैं.
कैद हैं..
कच्ची सी धूप में ..
सर्द की हवा सी ..
छुए जो मुझे
तू वो नूर है..
इन लम्हों में ..
मिला है जो मुझको ..
बहती सांझ की ..
तू हूर है...
सावन की खतायें..
फलक की रिहाएं..
तुझमें ..
कैद हैं ..
कैद हैं ..
तेरे कुर्ब रहना है..
तू है साहिल. .
उन्स कोई तुझसे मेरा ..
लगाया तुझसे दिल ..
ये बरसी है घटाऐं..
मेरे साये..
कैद हैं ..
कैद हैं ..
लकीरों से भी ज्यादा ..
मेरे हाथों में ..
तुझ तक जो जाएँ ..
वो राहें ..
कैद हैं..
कैद हैं ..

Youth..












 अब कौन रोकेगा ..
दिल ज़िद ना छोड़ेगा ..
सुखा समंदर ..
सब्र क्या मेरा तोड़ेगा..
खुद का हु कोच मैं..
एक नयी सोच मैं..
चल ना ..
दोड़ेगा ये समा भी ..
चल ना ..
 वक्त में हैं आँधियाँ भी ..
चल ना ..
रक्त में मर्जियाँ भी ..
चल ना ... PooetryFarm adsense
<script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script>
<!-- pooetryfarm_main_Blog1_1x1_as -->
<ins class="adsbygoogle"
     style="display:block"
     data-ad-client="ca-pub-9779078916230162"
     data-ad-slot="3793621268"
     data-ad-format="auto"
     data-full-width-responsive="true"></ins>
<script>
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
</script>

सीधा रस्ता क्यूँ चलूँ ..
जब उड़ भी में सकूं ..
पत्थर ढूँढेगा मुझे ..
उसके खातिर क्यूँ रूकूँ..
सबका आज हुँ मैं ..
कल की आवाज हूँ मैं..
मेरी दौड़ती आँधी को ..
कौन रोकेगा ..
चल ना ..
खुद का मिल गया इशारा ..
चल ना ..
वक्त है अपना ये सारा.
चल ना ..
जमाना है हमारा ..
चल ना ..

उड़कर आसमां में ..
मैनें ये जाना..
होता ही नहीं ..
वहां कोई ठिकाना ..
बस एक तूफानं होता है।
 खुद को हो जिसमें  पाना ..
पांव चलते ही रहें..
 सपना तो मेरा दौड़ेगा ..
चल ना ..
रोक सके ना ज़माना ..
चल ना ..
कल को गले लगा ना .
चल ना ..
होने दे खुद को मनमाना..
चल ना ...

My Hundred'th endeavour to make an art...


















my words are vivid..
Sometimes misty..
Words create a emotion..
Sometimes vapid, Sometimes fisky..
Fragrance of words..
Fills my heart..
attachment to the soul..
Make an art..

Words are scribbled..
Words are fluent..
Yet i can't convey..
 message that is congruent..
A lonely little thought..
Rotating into my mind..
I can't describe it..
Yet i can't sleep..
Without make those words rhymed..


Strumming of words..
Creates the music..
I love those struggle..
Worthy for amusing..
This joy gives me smile..
This smile brings delight..
Words are addictive..
Words are bright..

Precise amount of words..
Able to create mess or the harmony..
Certain words are scattered..
I am Putting them together for eternally..
These words are my treat..
Words are my heartbeat..




दूर चला आया मैं।।















गुज़र जाने दो अश्क ..
नैनो के किनारे से ..
हौसले फिसल जाने दो ..
हाथों के सहारे से ..
 मिल जाएगा कल ख्वाब नया..
आज सो जाने दो ..
मुझे तन्हा उन यादों में ..
 खो जाने दो ..
दूर बड़ी चला आया मैं ..
मुझे घर जाने दो ..
थक गए होंगे पाँव अब ..
इन राहों की चोटों से ..
उफ्फ भी नहीं निकलती ..
अब इन होठों से ..
शोर के इस सफर में ..
तन्हाई पाने दो
 मुझे  शहर की रोशनी से ..
दूर जाने दो ..
 बड़ी दूर चला आया मैं ..
मुझे घर जाने दो ..
खुद  को ढूँढने ..
 कब मैं चला था ..
खो आया हूँ खुद को ..
जहाँ मैं अब में ढला था ..
मुझे उस कल को फिर पाने दो ..
इस वक्त के जजीरे से निकल जाने दो ..
धुन वहीं फिर गाने दो ..
एक ताल थी जो मेरी वो ..
गुनगुनाने दो ..
दूर बड़ी चला आया मैं ..
मुझे घर जाने दो ..
चलकर उसी गलियारे में ..
मेरा घर ढूंढ लूँ..
वो मौसम पुराना ..
मेरा सबर ढूंढ लूँ ..
ठहर कर वहीं ..
मुझे फिर खुद को बनाने दो ..
एक नयी सोच में ..
मुझे ढल जाने दो ..
दूर बड़ी चला आया मैं ..
मुझे घर जाने दो ..